आली का कल्पना? अब नये मराठी लावणी का नाम होगा “कल्पनाऽऽ आली”
आजसे हम हिन्दी मे थोडा बहुत लिखाण करने की कोशिश करें। (होय त्या करेंगे मधला गे काढून टाकलाय कारण रामदेव बाबा हिंदीतून म्हणतात की वो मन की बीमारी है।)
अब हमको नही मालूम की ए मेरिका है या जूली का, लेकीन बीमारीच नही तो दवा कायकू लेनेका? ये सवाल आया तब हम सोचे की जब भगवान शिवजी भी हलाहल पी सकते है बिना गरज के तो हम सामान्य मानव दवादारू क्यू न ले? साला बीमा रिच लोगोंका नही गरीबोंका निकालना मँगता है। ये सब लालीलालेलालू जैसा घोटाला है।
सोऽहम बोले मरिचये नमः। और लगाया एक सूरज नमस्कार।
च्यूँ की उसमे “रिची रिच” बनने का फॉर्मुला मिलावट है ऐसा खबर आया।
हम को रिच बनने का कोई शौक तो नही लेकीन ये फॉर्म्युला तो बताना है सबको इसलिये ये सारा उपन्यास (जिसका मतलब हे “न्यास का सब”, जैसा की एडिटर का निचला होता है सब-एडिटर…
ये उपन्यास का उपद्व्याप “सचमुच काफी बडा है” उसलिये टेम फलीज। याने की कुछ मूँग फलीज।
समझ में आई नाबाद?
